मसूडों में सड़न से होती है दांतों की बीमारी

दांत में सड़न की समस्या को हल्के में लेना भूल है। कारण, इलाज में देरी से दांत की नसों का इंफेक्शन जबड़े की हड्डियों में फैल जाता है। इसमें पनपा मवाद किसी भी वक्त श्वसन नलिका (ट्रेकिया) में फंसकर जानलेवा हो सकता है।

मसूडों में सड़न के लक्षण – (Symptoms)

दांतों की बीमारी

इस बीमारी के कई चरण होते हैं। शुरूआती चरण के जिंजिवाइटिस कहते हैं। इस दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है। खून ब्रश या फ्लॉस करते समय या फिर यूँ ही निकल सकता है। डॉक्टर से मसूड़ों की जाँच कराते वक्त अगर खून बहता है। । तो यह भी जिंजिवाइटिस का लक्षण हो सकता है। इस बीमारी का अगला चरण है।

परिदंतिका (पेरिओडोन्टाइटिस)। इसमें दाँतों को मज़बूती देनेवाली चीजें जैसे, मसूड़ों के ऊतक (टिशू) और हड्डियाँ खराब होने लगते हैं। शुरू-शुरू में इसका पता नहीं चलता। जब यह पूरी तरह फैल जाती है, तभी मालूम होती है। इसकी कुछ निशानियाँ हैं, मसूड़ों में जगह (गम-पॉकेट) बनना, दाँतों का हिलना, दाँतों के बीच जगह बनना, मुंह से बदबू आना, मसूड़ों का दाँतों से अलग होना जिससे दाँतों का लंबा दिखायी देना और मसूड़ों से खून बहना वगैरह।

मसूड़ों की बीमार के कारण और उनके असर – Couses and effects

मसूड़ों की बीमारी कई कारणों से हो सकती है। दाँतों पर मैल (प्लाक) इसका सबसे बड़ा कारण होता है। यह असल में बैक्टीरिया (जीवाणुओं) की पतली परत होती है, जो दाँतों पर लगातार जमती रहती है। अगर इसे साफ न किया जाए,तो जीवाणु मसूड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं।

आगे चलकर इससे मसूड़े दाँतों से अलग होने लगते हैं। नतीजा, मसूड़ों के नीचे प्लाक बढ़ने लगता है और उसमें जीवाणु अपना अड्डा बनाने लगते हैं। एक बार जब जीवाणु यहाँ बस जाते हैं, तो धीरे-धीरे मसूड़ों की सूजन हड्डी और मसूड़ों के ऊतक (टिशू) को गलाने लगती है। प्लाक चाहे मसूड़ों से ऊपर हो या नीचे, जब यह सख्त हो जाता है, तो यह पत्थर जैसा बन जाता है, जिसे कैलकुलस (या आम तौर पर टारटर) कहते हैं।

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कैलकुलस को भी जीवाणु पूरी तरह ढक लेते हैं। सख्त होने और दाँतों से मज़बूती से चिपके होने की वजह से इसे प्लाक की तरह आसानी से को नहीं हटाया जा सकता। इसलिए जीवाणु मसूड़ों को और ज्यादा बढ़ते रहते हैं। आपको हमेशा अपने दांतो की अच्छी तरह केयर करनी चाहिए जिससे कि आपके मसूड़े हमेशा स्वस्थ रहे।

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